रामकथा की अमृत वर्षा से बही भक्ति बयार

सिद्धार्थनगर : नगर पंचायत मुख्यालय स्थित रामलीला मैदान में आयोजित संगीतमयी रामकथा में बीती शनिवार की रात्रि रामकथा में अमृत वर्षा, भजन-कीर्तन व आरती कार्यक्रम से चारों ओर भक्ति की बयार बहती नजर आई। भजन की पंक्तियों पर श्रोता भक्ति भाव के सागर में गोते लगाते से देखे गए।

बालसंत स्वामी स्वरूपानंद ने प्रवचन में कहा कि कैलाश के शिखर पर भवानी पार्वती ने भगवान शिव से चौदह प्रश्न किए, कि भगवान का अवतार क्यों और कैसे होता है। भगवान शिव ने कहा कि परमात्मा न जाति से बंधे हैं और न ही संपत्ति से, भगवान को बांधने वाली जो रस्सी है, उस रस्सी का नाम भक्ति है। संसार के लोग तन और धन देखते हैं, जबकि भगवान हमारे मन को देखते हैं।


महाराज ने कहा कि धार्मिक अनुष्ठान व कलिकाल में दान करने से ही मनुष्य को मुक्ति प्रदान हो सकती है। अपने साम‌र्थ्य के अनुसार सबको दान करना चाहिए। चाहे गरीब कन्या का विवाह हो, कोई असहाय रोगी अथवा गरीब छात्र की मदद, ये सभी पुण्य के कार्य हैं, इस कार्य में सहभागिता से मानव जीवन का उद्धार अवश्य होगा। श्रीराम जन्म के कारणों का वर्णन एवं अयोध्या की महिमा बताते हुए सरयू नदी जन्म की कथा के बारे में कहा कि इनका जन्म भगवान नारायण के नेत्र से हुआ, इसलिए इनका एक नाम नेत्रजा है। भगवान श्रीराम नारायण ब्रम्ह है जो कण-कण में व्याप्त है। दान के कारण ही महाराजा दशरथ को श्रीराम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघन जैसे पुत्र प्राप्त हुए।

प्रवचन से पूर्व आरती कार्यक्रम आयोजित हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु सम्मिलित हुए। आयोजक मधुसूदन अग्रहरि द्वारा सभी लोगों के प्रति आभार ज्ञापित किया गया। आचार्य राकेश शास्त्री, ब्लाक प्रमुख खुनियांव मनोज मौर्या, कन्हैया गुप्ता, उमाशंकर गोंड, राम सूरत, शिव प्रसाद, राकेश रावत, विशाल सर्राफ, सुधांशु अग्रहरि, शंभू अग्रहरि, गौरव मिश्रा, राजेश उपाध्याय, राजू दुब, विपिन, रामदेव, रतन, शिव पूजन, दुर्गेश, अजीत अग्रहरि आदि उपस्थित रहे